आखिर क्या हो सकता है बाबा रहीम का कथित मिशन ?
कोई डेरा प्रबंधन को इस सब का दोषी मानकर उनसे सवाल कर रहा
है तो कोई किसी चैनल के जरिये अपनी बात रख रहा है । कोई सरकार का मज़ाक बनाने में लगा
है तो कोई वकीलों दलीलों की मदद से बाबा को निर्दोष साबित करने में लगा है । कोई लोगों
को जगह जगह बाबा के दर्शन करवाने में लगा है तो कोई बाबा की फिल्मों को उनकी असली जिंदगी
से जोड़ने में लगा है । कोई इस प्रकरण में पीड़ित व्यक्तियों के साथ हमददर्दी जता रहा
है तो कोई बाबा को किसी साजिश का शिकार बता रहा है ।
इन सब
को ध्यान में रखकर हमने कुछ डेरा समर्थकों से बात करने की कोशिश की और जवाब में कुछ
अजीबो गरीब बातें सामने आयी, जो कहीं न कहीं इतिहास से मिलती जुलती है।
एक व्यक्ति
का कहना था कि बाबा मिशन पर गए हैं और उनके बिल में घुसकर उनको मारेंगे । जब मैंने
उनसे पूछा कि बाबा एक संत है, और वो सभी मनुष्यों को अपनी औलाद की तरह देखने का दावा
करते थे तो फिर उनकी दुश्मनी किससे है ? किसको मारना चाहते हैं बाबा ? और जेल में रहकर
कैसे मार देंगे बाबा किसी को ? क्या वो इतने स्वार्थी हैं कि अपने मिशन के लिए उन्होंने
सैंकड़ों लोगों को मरने दिया और हज़ारों को जेल में डाल दिया गया ? जवाब में वो मौन थे
।
दूसरे
व्यक्ति ने कहा कि वो भगवान हैं, वो अपनी मर्जी से गए हैं और अपनी मर्जी से आएंगे ।
उनसे मैंने सवाल किया कि जब बाबा की मर्जी पहले से ही जेल में जाने की थी तो क्या उन्हें
इस बात का अंदाजा नहीं था कि उनकी इस मर्जी में उनके भक्तों की दर्दनाक मौत भी लिखी
है ?
क्या बाबा ने कभी अपनी सभा में या कहीं भी कभी इस बात का जिक्र किया है अगर उन्हें
4-6 महीने के लिए सबसे अलग होना पड़े तो ऐसी प्रस्थिति में डेरा के लोगों को कैसे काम
करना है ? अगर वो भगवान है तो क्या वो अपने ही भक्तों के साथ अपनी वजह से अत्याचार होने देगा ? जवाब
में वो भी मौन थे ।
तीसरे
व्यक्ति ने कहा कि ये बाबा का राज़ है और वो यह कहकर गए हैं कि वो इतिहास लिखने जा रहे
हैं । अगर यकीन न आये तो उनके you tube चैनल से life changing tips सुनो । यहाँ मुझे
कुछ आस्था दिखाई दी । सभी वीडियो को सुनने के बाद इस बात का अंदाजा हुआ कि बाबा
खुद को सबका सेवक समझते हैं । वो कभी अपनी पूजा नहीं करवाते, कभी किसी व्यक्ति या धर्म
विशेष का ज्ञान नहीं देते तो सवाल यह है कि फिर उन्हें भगवान क्यों माना जाता है ?
कुछ
बुजुर्ग और बुद्धिजीवी वर्ग से बाबा के बारे में बात की तो उनका कहना था कि वो बाबा
को इसलिए मानते हैं क्यूंकि उन्हें उनके जैसा समाज सुधारक नहीं मिला और उन जैसे कार्य
किसी ने नहीं किये । बाकी जो भी तर्क लोगों ने दिए उनका कोई आधार नहीं था ।
सवाल
यह कि बाबा राम रहीम किसकी साजिश का शिकार है, और कौन है उनके दुश्मन ? क्या करेंगे
उनके समर्थक उन्हें निर्दोष साबित करने के लिए ? अगर बाबा राम रहीम के समर्थक उन्हें
सच्चा गुरु या ईश्वर का अवतार मानते हैं तो उन्हें पहले इतिहास में हुई इसी तरह की
घटनाओं को समझना होगा ।
अगर
बात करें पैगम्बर मोहम्मद साहिब की, गुरु नानक देव जी की, कबीर दास जी की, गुरु गोबिंद
सिंह जी की, ईसा मसीह जी की और अन्य धर्म गुरुओं की, सभी फकीरों को उस समय की सरकारों
ने गद्दार, आतंकवादी, बागी जैसा दर्जा दिया हुआ था । उन्हें सिर्फ इसी लिए यातनाये
दी गयी क्यूंकि उनके शिष्य उन्हें सरकारों और धर्म के ठेकेदारों से ऊपर उठकर भगवान
का दर्जा देते थे ।
वास्तव
में धर्म गुरुओं की लड़ाई सत्ता के अहंकार में चूर अपने आप को धर्म से ऊपर समझने वाले
राजाओं और धर्म के ठेकेदारों के खिलाफ ही रही है । गुरु
के सानिध्य में उनके शिष्यों को उनकी ईश्वरीय शक्तियों का एहसास हो जाता था लेकिन शिष्य
कभी भी दुनिया को अपने गुरु की वास्तविकता का एहसास नहीं करवा सके और दूसरी ओर किसी भी गुरु
ने कभी अपने आप को भगवान नहीं कहा इसलिए उनकी वास्तविकता दुनिया को उनके संसार से चले
जाने के बाद ही समझ में आई ।
हम किसी
फ़कीर से किसी की तुलना नहीं करते, सब अपनी अपनी जगह महान हैं । लेकिन डेरा समर्थकों
को मेरा सुझाव है कि अगर वे अपने गुरु को ईश्वरीय अवतार समझते हैं और वो किसी नए इतिहास
बनने की कल्पना कर रहे हैं तो उन्हें इतिहास से सबक लेना चाहिए कि उनके गुरु को सिर्फ
इसलिए जेल में भेझा गया है क्यूंकि उनके शिष्य सरकार और धर्म के ठेकेदारों से ऊपर उठकर
उन्हें सरेआम ईश्वर कहने लगे थे ।
भारत की
भाजपा सरकार खुद को सत्ता और धर्म दोनों का ठेकेदार समझती है और कुछ कुछ वैसा ही कर
रही है बाबा राम रहीम जी के साथ ।
बाबा
राम रहीम के समर्थकों को ये समझना होगा कि इतिहास उन्हें खुद बनाना है न कि बाबा राम
रहीम को । उन्हें आध्यात्मिक और दुनियावी, दोनों पहलुओं का तालमेल बनाना होगा और तर्क
के साथ ये साबित करना होगा कि बाबा राम रहीम ईश्वर का अवतार हैं । अगर वो ऐसा करने
में कामयाब होते हैं तो इतिहास में यह एक नया उदाहरण बनेगा ।
अन्यथा
हर बार की तरह गुरु के चले जाने के बाद ही लोग उनकी असलियत समझ पाएंगे और बाद में अपनी
नाकामी को आतंकवाद में बदल देंगे । अगर बाबा राम रहीम एक सच्चे फ़कीर हैं और वो इसी
अवस्था से गुजर रहे हैं तो उनके शिष्यों को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए और उनकी सोच
और शिक्षा को तर्क के साथ दुनिया में सर्वश्रेष्ठ साबित करने के लिए हर संभव प्रयास
करने चाहिए ।








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